Important News and Articles: 15 January 2026

करेंट अफेयर्स: 15 जनवरी 2026
Read in English / अंग्रेजी में पढ़ें:

दैनिक करेंट अफेयर्स: बैंकिंग सुधार, नदी विवाद और पर्यावरण

Important News and Articles: 15 January 2026

आज के विस्तृत दैनिक समाचार विश्लेषण में आपका स्वागत है। आज हम सहकारी बैंकों (Cooperative Banks) पर आरबीआई (RBI) के नए दृष्टिकोण, केरल और केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण पर्यावरण अपडेट और बिहार-झारखंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे जल विवाद के समाधान पर चर्चा करेंगे। आइए इन खबरों को विस्तार से जानें।


1. बैंकिंग अर्थव्यवस्था: आरबीआई द्वारा शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) के लाइसेंस की बहाली

सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में विश्वास जताते हुए, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) के लिए लाइसेंस जारी करना फिर से शुरू करने का प्रस्ताव दिया है। यह कदम लगभग दो दशकों के अंतराल के बाद उठाया गया है, जो शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है।

शहरी सहकारी बैंक (UCBs) क्या हैं?

UCBs वे वित्तीय संस्थान हैं जो सहकारी सिद्धांतों पर काम करते हैं। यद्यपि किसी एक विशिष्ट अधिनियम में औपचारिक रूप से परिभाषित नहीं हैं, लेकिन ये शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्थित प्राथमिक सहकारी बैंकों को संदर्भित करते हैं।

  • ऐतिहासिक जड़ें: भारत में सहकारी आंदोलन नया नहीं है। पहला औपचारिक कानून सहकारी ऋण समितियां अधिनियम 1904 था, जिसे लॉर्ड कर्जन के कार्यकाल के दौरान बनाया गया था। देश की पहली शहरी सहकारी ऋण समिति, 'अन्योन्‍या सहकारी मंडली' (Anyonya Sahakari Mandali), 1889 में बड़ौदा में स्थापित की गई थी।
  • कार्य (Functions): ये "आम आदमी" की जीवनरेखा हैं। ये आवास वित्त, व्यक्तिगत ऋण और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), छोटे व्यापारियों और वेतनभोगी व्यक्तियों को कार्यशील पूंजी प्रदान करते हैं।

"दोहरा नियंत्रण" (Dual Regulation) की चुनौती

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक UCBs का नियामक ढांचा है, जिसे अक्सर "दोहरा नियंत्रण" कहा जाता है।

  • आरबीआई (RBI) की भूमिका: बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के तहत, आरबीआई बैंकिंग कार्यों को संभालता है। इसमें लाइसेंसिंग (धारा 22 और 23), ब्याज दरें और परिचालन क्षेत्र शामिल हैं।
  • राज्य/केंद्रीय रजिस्ट्रार की भूमिका: प्रशासनिक पहलू—जैसे पंजीकरण, प्रबंधन चुनाव, ऑडिट और परिसमापन (liquidation)—संबंधित राज्य सरकारों (राज्य सहकारी समिति अधिनियम) या केंद्र सरकार (बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम, 2002) द्वारा शासित होते हैं।

शहरी सहकारी बैंक (UCBs) प्रश्नोत्तरी

प्रश्न 1: शहरी सहकारी बैंकों के बैंकिंग कार्यों को कौन नियंत्रित करता है?
उत्तर: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)।

प्रश्न 2: UCBs का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
उत्तर: शहरी/अर्ध-शहरी क्षेत्रों में छोटे उधारकर्ताओं, व्यापारियों और समुदायों को ऋण और बैंकिंग सेवाएं प्रदान करना।


2. शासन: बिहार में क्षेत्रीय उपभोक्ता संरक्षण कार्यशाला

पटना हाल ही में पूर्वी भारत में उपभोक्ता अधिकारों का केंद्र बिंदु बन गया। भारत सरकार ने बिहार की राजधानी में एक विशाल क्षेत्रीय उपभोक्ता संरक्षण कार्यशाला का आयोजन किया, जो पूर्वी राज्यों की विशिष्ट आवश्यकताओं पर केंद्रित थी।

मुख्य बिंदु

  • क्षेत्रीय केंद्र: कार्यशाला में बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के हितधारकों ने भाग लिया। यह क्षेत्र में नीतिगत सुधारों को आगे बढ़ाने में बिहार की उभरती नेतृत्व भूमिका को उजागर करता है।
  • तकनीक-आधारित समाधान (ई-जागृति): कार्यशाला का मुख्य फोकस ई-जागृति (E-Jagriti) पोर्टल पर था। यह एआई-संचालित (AI-driven) प्लेटफॉर्म ई-दाखिल (शिकायत दर्ज करने के लिए), सुनवाई के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और उपभोक्ता मामलों के बैकलॉग को कम करने के लिए रीयल-टाइम डैशबोर्ड को एकीकृत करता है।
  • हेल्पलाइन: इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (टोल-फ्री 1915) के महत्व को दोहराया गया, जो शिकायत निवारण का पहला बिंदु है।

3. पर्यावरण: केरल का पहला 'तितली अभयारण्य'

जैव विविधता संरक्षण की दिशा में एक सुंदर कदम उठाते हुए, केरल सरकार ने आधिकारिक तौर पर कन्नूर जिले में स्थित अरलम वन्यजीव अभयारण्य का नाम बदलकर अरलम तितली अभयारण्य (Aralam Butterfly Sanctuary) कर दिया है।

🦋 नाम क्यों बदला गया? यह केवल नाम बदलने की बात नहीं है। यह अभयारण्य तितली प्रजातियों की असाधारण रूप से समृद्ध प्रचुरता और विविधता का घर है। इसका नाम बदलने से संरक्षण के प्रयास विशेष रूप से इन परागणकों (pollinators) और उनके मेजबान पौधों पर केंद्रित होंगे।

पारिस्थितिक संदर्भ: यह अभयारण्य पश्चिमी घाट का हिस्सा है, जो एक यूनेस्को विश्व प्राकृतिक धरोहर स्थल है। यह वन्यजीवों की आवाजाही के लिए एक महत्वपूर्ण गलियारे के रूप में कार्य करता है और स्थानिक प्रजातियों के लिए एक हॉटस्पॉट है। यह अधिसूचना वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत जारी की गई थी।


4. संस्थागत सुधार: पर्यावरण मंत्रालय ने लॉन्च किया 'निरंतर' (NIRANTAR)

सरकारी विभागों में समन्वय की कमी अक्सर पर्यावरण संरक्षण में बाधा डालती है। इसे हल करने के लिए, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री (MoEFCC) ने निरंतर प्लेटफॉर्म (NIRANTAR Platform) का संचालन शुरू किया है।

'निरंतर' क्या है?

यह एक डिजिटल, एकीकृत डैशबोर्ड है जिसे पर्यावरण प्रशासन के लिए एक तंत्रिका तंत्र (nervous system) के रूप में कार्य करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

  • समन्वय: यह प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB/SPCBs), भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI), और भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) जैसी प्रमुख संस्थाओं को जोड़ता है।
  • रीयल-टाइम एक्शन: मासिक रिपोर्ट की प्रतीक्षा करने के बजाय, यह प्लेटफॉर्म निम्नलिखित की रीयल-टाइम ट्रैकिंग की अनुमति देता है:
    • पर्यावरण मंजूरी (Environmental Clearances)।
    • जंगल की आग के अलर्ट (गर्मी के महीनों के लिए महत्वपूर्ण)।
    • वन्यजीव तस्करी डेटा।
  • विकास: यह परिवेश (PARIVESH) जैसी पिछली प्रणालियों पर आधारित है, लेकिन अंतर-एजेंसी सहयोग के लिए एक व्यापक दायरा प्रदान करता है।

5. अंतरराज्यीय संबंध: सोन नदी विवाद का समाधान

सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) की एक बड़ी जीत में, बिहार कैबिनेट ने इंद्रपुरी जलाशय परियोजना को मंजूरी दे दी है। यह झारखंड राज्य के साथ सोन नदी पर दशकों पुराने जल-बंटवारे के विवाद को सुलझाने के बाद संभव हो पाया है।

विवाद और समाधान

  • पृष्ठभूमि: यह संघर्ष बिहार के विभाजन के समय से चला आ रहा है। 1973 के बाणसागर समझौते के तहत, अविभाजित बिहार को एक विशिष्ट जल आवंटन (7.75 MAF) प्राप्त था। झारखंड के अलग होने के बाद, उसने एक अलग, परिभाषित हिस्से की मांग की।
  • समझौता ज्ञापन (MoU): पूर्वी क्षेत्रीय परिषद (संविधान का अनुच्छेद 263) में चर्चा के माध्यम से विवाद का समाधान किया गया। दोनों राज्य एक मसौदा समझौता ज्ञापन (MoU) पर सहमत हुए, जिसे केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने मंजूरी दी।

प्रभाव: इंद्रपुरी जलाशय

विवाद के निपटारे के साथ, रोहतास जिले में जलाशय का निर्माण आगे बढ़ सकता है। यह बिहार के "धान के कटोरे" (Rice Bowl) में कृषि के लिए एक गेम-चेंजर है।

  • लाभार्थी जिले: भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल, गया और पटना।
  • लाभ: यह सिंचाई के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करता है, जिससे दक्षिण बिहार में ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा मिलेगा।

6. समुद्री विरासत: भारतीय प्रकाशस्तंभ महोत्सव

"भाग्य का शहर" (City of Destiny) कहे जाने वाले विशाखापत्तनम ने तीसरे भारतीय प्रकाशस्तंभ महोत्सव (Indian Lighthouse Festival) की मेजबानी की, जिसका उद्घाटन केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने किया। यह आयोजन कार्यात्मक नेविगेशन सहायता (Lighthouses) को पर्यटक हॉटस्पॉट में बदलने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है।

  • दृष्टिकोण: यह महोत्सव मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 और सागरमाला कार्यक्रम के अनुरूप है। इसका लक्ष्य "बंदरगाह-नेतृत्व वाला विकास" है, जिसमें पर्यटन के माध्यम से तटीय समुदायों को सशक्त बनाना शामिल है।
  • नई परियोजनाएं:
    • आंध्र प्रदेश का पहला प्रकाशस्तंभ संग्रहालय (Lighthouse Museum) विशाखापत्तनम में स्थापित किया जाएगा।
    • असम के नदी क्षेत्रों (संभवतः ब्रह्मपुत्र पर) में चार नए प्रकाशस्तंभ विकसित किए जाएंगे, जो इस अवधारणा को समुद्र तटों से परे नदियों तक विस्तारित करेंगे।

आज का विस्तृत विश्लेषण यहीं समाप्त होता है। सोन नदी के किनारे से लेकर केरल के तितली से भरे जंगलों तक, सूचित रहना ही सफलता की कुंजी है। अपनी पढ़ाई जारी रखें!