भौतिक भूगोल: 1. पृथ्वी की उत्पत्ति एवं विकास

अध्याय 2: पृथ्वी की उत्पत्ति एवं विकास - विस्तृत शोधपरक नोट्स
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पृथ्वी की उत्पत्ति एवं विकास: एक वैज्ञानिक महाकाव्य

भौतिक भूगोल: 1. पृथ्वी की उत्पत्ति एवं विकास

मानव सभ्यता के विकास के साथ-साथ हमारी जिज्ञासा का दायरा धरती से उठकर सितारों तक पहुँच गया है। नर्सरी की कक्षा में 'ट्विंकल-ट्विंकल लिटिल स्टार' गुनगुनाने वाले बच्चों के मन में जो प्रश्न उठते हैं, वे वास्तव में ब्रह्मांड विज्ञान के आधारभूत प्रश्न हैं। यह ब्रह्मांड कैसे बना? हमारी पृथ्वी का जन्म कब हुआ? क्या हम कभी आकाश के छोर तक पहुँच पाएंगे? इन प्रश्नों के उत्तर खोजने के लिए वैज्ञानिकों ने सदियों तक शोध किया है। यह लेख पृथ्वी की उत्पत्ति से लेकर उस पर जीवन की पहली धड़कन तक की अरबों वर्षों की यात्रा का सूक्ष्म और विस्तृत विवरण प्रस्तुत करता है।


1. पृथ्वी की उत्पत्ति: आरंभिक और लोकप्रिय सिद्धांत

पृथ्वी की उत्पत्ति के संबंध में विभिन्न युगों में दार्शनिकों और वैज्ञानिकों ने अनेक परिकल्पनाएँ प्रस्तुत की हैं। इन सिद्धांतों को मोटे तौर पर दो भागों में बाँटा जा सकता है—एकतारक परिकल्पना (Monistic) और द्वैतारक परिकल्पना (Binary)।

A. नीहारिका परिकल्पना (Nebular Hypothesis)

जर्मन दार्शनिक इमैनुअल कान्ट (Immanuel Kant) को इस दिशा में प्रारंभिक चिन्तक माना जाता है। 1796 में गणितज्ञ लाप्लेस (Laplace) ने इसमें महत्वपूर्ण संशोधन किए।

  • इस मत के अनुसार, ग्रहों का निर्माण सूर्य की युवा अवस्था से संबंधित था।
  • एक विशाल और गर्म 'नीहारिका' (धूल और गैस का बादल) अत्यंत धीमी गति से अंतरिक्ष में घूम रही थी।
  • जैसे-जैसे यह ठंडी होकर सिकुड़ी, इसकी घूर्णन गति बढ़ी और इससे छल्ले अलग हुए, जो बाद में संघनित होकर ग्रहों में परिवर्तित हो गए।

B. द्वैतारक और ज्वारीय सिद्धांत (Binary Theories)

1900 में चेम्बरलेन और मोल्टन ने एक भिन्न तर्क दिया। उन्होंने माना कि सूर्य के पास से एक विशाल 'भ्रमणशील तारा' गुजरा।

  • उस तारे के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के कारण सूर्य की सतह से 'सिगार' (Cigar) के आकार का एक गैसीय टुकड़ा बाहर निकल आया।
  • जब वह तारा दूर चला गया, तो वह पदार्थ वापस सूर्य में नहीं मिल सका और सूर्य के चारों ओर चक्कर काटने लगा। यही पदार्थ कालांतर में ठंडा होकर ग्रहों के रूप में विकसित हुआ।
  • सर जेम्स जींस और सर हॅरोल्ड जैफरी ने भी इस 'ज्वारीय मत' का पुरजोर समर्थन किया।
🔍 ओटो शिमिड और कार्ल वाइज़ास्कर का योगदान:
1950 में इन वैज्ञानिकों ने नीहारिका परिकल्पना को आधुनिक रूप दिया। उन्होंने बताया कि सूर्य हाइड्रोजन, हीलियम और धूलिकणों से बनी एक 'सौर नीहारिका' से घिरा था। इन कणों के बीच हुए घर्षण और टकराने से एक चपटी तश्तरी बनी और 'अभिवृद्धि' (Accretion) की प्रक्रिया द्वारा वर्तमान ग्रहों का निर्माण संभव हुआ।

2. आधुनिक सिद्धांत: ब्रह्मांड की उत्पत्ति (Big Bang Theory)

आज के समय में ब्रह्मांड की उत्पत्ति के संबंध में सबसे मान्य सिद्धांत 'बिग बैंग सिद्धांत' है। इसे विस्तारित ब्रह्मांड परिकल्पना (Expanding Universe Hypothesis) भी कहा जाता है।

एडविन हब्बल के प्रमाण (1920):

एडविन हब्बल ने खगोलीय साक्ष्यों के आधार पर यह सिद्ध किया कि ब्रह्मांड का निरंतर विस्तार हो रहा है। आकाशगंगाएँ एक-दूसरे से दूर भाग रही हैं।

🎈 गुब्बारे का उदाहरण: यदि आप एक गुब्बारे पर कुछ निशान लगाएँ (जो आकाशगंगाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं) और उसे फुलाएँ, तो आप देखेंगे कि निशान एक-दूसरे से दूर जा रहे हैं। हालांकि, वैज्ञानिक यह भी स्पष्ट करते हैं कि गुब्बारे के निशान स्वयं भी बड़े होते हैं, जबकि वास्तविक आकाशगंगाएँ स्वयं विस्तार नहीं करतीं, केवल उनके बीच की दूरी बढ़ती है।

बिग बैंग की तीन अवस्थाएं:

  1. एकाकी परमाणु: प्रारंभ में ब्रह्मांड का सारा पदार्थ एक अत्यंत सूक्ष्म बिंदु (Singularity) के रूप में था। इसका आयतन नगण्य लेकिन तापमान और घनत्व अनंत था।
  2. महाविस्फोट: आज से लगभग 13.7 अरब वर्ष पहले इस बिंदु में भीषण विस्फोट हुआ। इसके बाद मात्र एक सेकंड के अल्पांश में ही ब्रह्मांड का विस्मयकारी विस्तार हुआ।
  3. पारदर्शिता: विस्फोट के शुरुआती 3 मिनट में पहले परमाणु का निर्माण हुआ। लगभग 3 लाख वर्षों के भीतर तापमान गिरकर 4500 केल्विन तक आ गया और ब्रह्मांड पारदर्शी हो गया।

3. तारों और ग्रहों का निर्माण: नीहारिका से पिंड तक

ब्रह्मांड में पदार्थ का वितरण समान नहीं था। घनत्व की इस सूक्ष्म भिन्नता ने गुरुत्वाकर्षण बलों में अंतर पैदा किया, जिससे पदार्थ का एकत्रण शुरू हुआ।

तारों का जन्म:

  • एक आकाशगंगा में अरबों तारों का समूह होता है। इसका व्यास 80 हजार से 1.5 लाख प्रकाश वर्ष तक हो सकता है।
  • हाइड्रोजन गैस के विशाल बादलों (नीहारिका) के संचयन से गैस के झुंड बने। ये झुंड और घने होते गए और ताप बढ़ने से तारों का निर्माण हुआ।
  • माना जाता है कि तारों का निर्माण लगभग 5 से 6 अरब वर्ष पहले हुआ था।
⭐ प्रकाश वर्ष (Light Year):
यह समय का नहीं, बल्कि दूरी का मात्रक है। प्रकाश की गति 3 लाख किमी प्रति सेकंड है। एक वर्ष में प्रकाश जितनी दूरी तय करता है, उसे प्रकाश वर्ष कहते हैं (9.46 × 1012 किमी)। सूर्य और पृथ्वी की औसत दूरी मात्र 8.311 प्रकाश-मिनट है।

ग्रहों के विकास की अवस्थाएं:

ग्रहों का निर्माण एक क्रमिक प्रक्रिया थी जिसे तीन चरणों में समझा जा सकता है:

  • प्रथम चरण: तारे के भीतर गैस के गुंथित झुंडों ने गुरुत्वाकर्षण से एक क्रोड बनाया, जिसके चारों ओर गैस और धूल की एक घूमती हुई तश्तरी (Rotating Disc) बनी।
  • द्वितीय चरण: तश्तरी का पदार्थ छोटे गोलों में संघनित हुआ। अणुओं के आपसी आकर्षण से ये **'ग्रहाणु' (Planetesimals)** बने।
  • अंतिम चरण: कई ग्रहाणुओं के आपस में टकराने और गुरुत्व के कारण जुड़ने (Accretion) से विशाल ग्रहों का जन्म हुआ।

4. हमारा सौरमंडल: एक परिचय

हमारे सौरमंडल में सूर्य (तारा), 8 ग्रह, 63 से अधिक उपग्रह, क्षुद्रग्रह (Asteroids), धूमकेतु और धूलिकण शामिल हैं। इनकी उत्पत्ति लगभग 4.6 अरब वर्ष पहले हुई थी।

पार्थिव बनाम जोवियन ग्रह (Inner vs Outer Planets):

विशेषता पार्थिव ग्रह (Terrestrial) जोवियन ग्रह (Jovian)
ग्रहों के नामबुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगलबृहस्पति, शनि, यूरेनस, नेपच्यून
दूरीसूर्य के बहुत समीपसूर्य से अत्यधिक दूर
संरचनाशैल और धातुओं से बने (ठोस)गैसों (H2, He) से बने (विशाल)
वायुमंडलविरल या पतलाअत्यंत सघन और मोटा
घनत्वअपेक्षाकृत अधिकअपेक्षाकृत कम
❓ भीतरी ग्रह ठोस और बाहरी ग्रह गैसीय क्यों हैं?
1. भीतरी ग्रह सूर्य के करीब थे, जहाँ अत्यधिक तापमान के कारण हल्की गैसें संघनित नहीं हो पाईं।
2. 'सौर पवनों' (Solar Winds) ने इन ग्रहों से गैस और धूल को उड़ा दिया।
3. इनका गुरुत्वाकर्षण कम होने के कारण ये अपनी गैसों को पकड़कर नहीं रख सके।

5. चंद्रमा की उत्पत्ति: "द बिग स्प्लैट" (The Big Splat)

चंद्रमा पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह है। 1838 में सर जॉर्ज डार्विन ने इसे 'प्रशांत महासागर के गर्त' से निकला हुआ माना था, लेकिन आधुनिक विज्ञान **'द बिग स्प्लैट'** (Giant Impact Theory) को स्वीकार करता है।

  • माना जाता है कि लगभग 4.44 अरब वर्ष पहले, मंगल ग्रह से तीन गुना बड़े आकार का एक पिंड (Theia) पृथ्वी से टकराया।
  • टक्कर इतनी भीषण थी कि पृथ्वी का एक बड़ा हिस्सा टूटकर अंतरिक्ष में बिखर गया।
  • यही बिखरा हुआ मलबा पृथ्वी की कक्षा में घूमने लगा और कालांतर में संगठित होकर चंद्रमा बना।

6. पृथ्वी का उद्भव और स्थलमंडल का विकास

प्रारंभ में पृथ्वी एक गर्म, वीरान और चट्टानी पिंड थी। इसका वायुमंडल हाइड्रोजन और हीलियम से बना विरल आवरण था।

विभेदन (Differentiation) की प्रक्रिया:

जब पृथ्वी गर्म और द्रव अवस्था में थी, तब घनत्व के अंतर के कारण पदार्थों का अलगाव शुरू हुआ:

  • भारी पदार्थ (लोहा और निकल): पृथ्वी के केंद्र की ओर चले गए और 'क्रोड' (Core) का निर्माण किया।
  • हल्के सिलिकेट पदार्थ: पृथ्वी की ऊपरी सतह की ओर आ गए और ठंडे होकर 'भूपर्पटी' (Crust) बने।
  • इसी प्रक्रिया से पृथ्वी की **परतदार संरचना** का विकास हुआ (पर्पटी, प्रावार, बाह्य क्रोड और आंतरिक क्रोड)।

7. वायुमंडल एवं जलमंडल का क्रमिक विकास

पृथ्वी के वर्तमान वायुमंडल (नाइट्रोजन और ऑक्सीजन की प्रधानता) का विकास तीन प्रमुख अवस्थाओं में हुआ:

  1. प्रथम अवस्था: सौर पवनों के कारण प्रारंभिक हाइड्रोजन और हीलियम युक्त वायुमंडल का लोप हो गया।
  2. द्वितीय अवस्था (गैस उत्सर्जन - Degassing): पृथ्वी के ठंडा होने के दौरान ज्वालामुखी विस्फोटों से भाप, जलवाष्प, नाइट्रोजन, CO2 और मीथेन बाहर निकले। इस समय स्वतंत्र ऑक्सीजन नहीं थी।
  3. तृतीय अवस्था (संशोधन): जैसे-जैसे पृथ्वी और ठंडी हुई, जलवाष्प संघनित होकर वर्षा के रूप में बरसी। गर्तों में पानी भरने से महासागरों का निर्माण हुआ। लगभग 300 करोड़ वर्ष पूर्व **प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis)** की प्रक्रिया महासागरों में विकसित हुई, जिसने वायुमंडल में ऑक्सीजन को भरना शुरू किया।
🌊 महासागरों की आयु: महासागर पृथ्वी की उत्पत्ति के मात्र 50 करोड़ वर्षों के भीतर (लगभग 400 करोड़ वर्ष पूर्व) बन गए थे। वायुमंडल में ऑक्सीजन की प्रचुरता लगभग 200 करोड़ वर्ष पूर्व संभव हुई।

8. जीवन की उत्पत्ति: रसायनों से चेतना तक

जीवन का विकास लगभग 380 करोड़ वर्ष पहले आरंभ हुआ। आधुनिक वैज्ञानिक इसे एक जटिल रासायनिक प्रतिक्रिया (Chemical Evolution) मानते हैं।

  • प्रारंभ में जटिल कार्बनिक अणु बने जो स्वयं को दोहराने (Replication) में सक्षम थे।
  • 300 करोड़ साल पुरानी चट्टानों में मिली सूक्ष्म संरचनाएं आज की नील-हरित शैवाल (Cyanobacteria) जैसी हैं।
  • एककोशीय जीवाणु से लेकर आज के विकसित मनुष्य तक की यात्रा का सारांश **'भूवैज्ञानिक काल मापक्रम'** (Geological Time Scale) में मिलता है।

अभ्यास: महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर (परीक्षा की दृष्टि से)

1. पार्थिव ग्रह चट्टानी क्यों हैं?
उत्तर: सूर्य के निकट उच्च तापमान और तीव्र सौर पवनों के कारण इन ग्रहों से हल्की गैसें उड़ गईं, जिससे केवल ठोस शैल और धातुएँ बचीं।

2. विभेदन प्रक्रिया क्या है?
उत्तर: पृथ्वी के गर्म होने पर घनत्व के अंतर के कारण भारी पदार्थों (जैसे लोहा) का केंद्र में जाना और हल्के पदार्थों का सतह पर आना विभेदन कहलाता है।

3. प्रकाश वर्ष किसका मात्रक है?
उत्तर: यह दूरी का मात्रक है, न कि समय का।

4. बिग बैंग की घटना कब हुई?
उत्तर: आज से लगभग 13.7 अरब वर्ष पूर्व।


निष्कर्ष: एक अद्भुत संतुलन

पृथ्वी का विकास एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। एक जलते हुए आग के गोले से एक जीवनदायी नीले ग्रह में बदलने का यह सफर प्रकृति के अद्भुत संतुलन को दर्शाता है। बिग बैंग के महाविस्फोट से लेकर आज की जैव-विविधता तक, हर कदम पर भौतिकी और रसायन विज्ञान के जटिल नियमों ने कार्य किया है। पृथ्वी न केवल हमारा घर है, बल्कि यह ब्रह्मांड के अरबों वर्षों के इतिहास का जीवित साक्ष्य है। इसकी सुरक्षा और इसके संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग ही मानवता के भविष्य को सुनिश्चित कर सकता है।

💡 अंतिम संदेश: ब्रह्मांड की विशालता हमें विनम्रता सिखाती है और पृथ्वी की विशिष्टता हमें जिम्मेदारी का अहसास कराती है। भूगोल केवल मानचित्रों का अध्ययन नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व की जड़ों को खोजने का विज्ञान है।