करेंट अफेयर्स: 2 फरवरी 2026

करेंट अफेयर्स: 2 फरवरी 2026
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दैनिक करेंट अफेयर्स: पर्यावरण, संस्कृति और रक्षा

करेंट अफेयर्स: 2 फरवरी 2026

आज के समाचार विश्लेषण में आपका स्वागत है। आज का दिन पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि हम 'विश्व आर्द्रभूमि दिवस' (World Wetlands Day) मना रहे हैं। इसके साथ ही, भारतीय सेना में महिला सशक्तिकरण की एक नई मिसाल कायम हुई है और मेघालय की अनूठी संस्कृति को वैश्विक पहचान मिलने की उम्मीद जगी है। आइए विस्तार से जानते हैं।


1. पर्यावरण: भारत की रामसर सूची में दो नए आर्द्रभूमि स्थल शामिल

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भारत ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उत्तर प्रदेश और गुजरात से दो नए आर्द्रभूमि (Wetlands) स्थलों को 'अंतर्राष्ट्रीय महत्व के आर्द्रभूमि' की प्रतिष्ठित रामसर सूची (Ramsar List) में शामिल किया गया है। इसके साथ ही भारत का रामसर नेटवर्क, जो 2014 में केवल 26 स्थलों तक सीमित था, 2026 में बढ़कर 98 स्थलों तक पहुंच गया है।

नए शामिल स्थल:

1. पटना पक्षी अभयारण्य (Patna Bird Sanctuary):
  • स्थान: यह उत्तर प्रदेश के एटा (Etah) जिले में स्थित है।
  • महत्व: यह सबसे छोटे संरक्षित पक्षी अभयारण्यों में से एक है, लेकिन जैव विविधता के मामले में बहुत समृद्ध है। इसे 'महत्वपूर्ण पक्षी और जैव विविधता क्षेत्र' (IBA) के रूप में मान्यता प्राप्त है। यह सर्दियों में प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण आश्रय स्थल है।
2. छारी-धांड आर्द्रभूमि (Chhari-Dhand Wetland):
  • स्थान: गुजरात के कच्छ जिले (Rann of Kutch) में स्थित है।
  • अर्थ: सिंधी/कच्ची भाषा में 'छारी' का अर्थ है खारा और 'धांड' का अर्थ है उथला गीला क्षेत्र।
  • महत्व: यह एक मौसमी खारा आर्द्रभूमि (Seasonal saline wetland) है। यह रेगिस्तानी जैव विविधता और प्रवासी जलपक्षियों, विशेष रूप से राजहंस (Flamingos) और सारस के लिए महत्वपूर्ण है।

रामसर कन्वेंशन क्या है? (Static GK)

यह आर्द्रभूमियों के संरक्षण और उनके संसाधनों के सतत उपयोग के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है।

  • हस्ताक्षर: इस पर 1971 में ईरान के रामसर शहर में हस्ताक्षर किए गए थे।
  • भारत की भागीदारी: भारत 1 फरवरी 1982 को इसका हस्ताक्षरकर्ता बना।
  • विश्व आर्द्रभूमि दिवस: यह हर साल 2 फरवरी को मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन 1971 में कन्वेंशन को अपनाया गया था।
  • महत्व: आर्द्रभूमि को "पृथ्वी की किडनी" (Kidneys of the Earth) कहा जाता है क्योंकि वे पानी को शुद्ध करते हैं, बाढ़ को नियंत्रित करते हैं और कार्बन को सोखते हैं।

रामसर साइट्स प्रश्नोत्तरी

प्रश्न 1: 2026 तक भारत में कुल कितने रामसर स्थल हैं?
उत्तर: 98 स्थल।

प्रश्न 2: विश्व आर्द्रभूमि दिवस कब मनाया जाता है?
उत्तर: 2 फरवरी।

प्रश्न 3: पटना पक्षी अभयारण्य किस राज्य में स्थित है?
उत्तर: उत्तर प्रदेश (एटा जिला)।


2. कला और संस्कृति: मेघालय के 'लिविंग रूट ब्रिज' यूनेस्को के लिए नामांकित

प्रकृति और मानव सरलता के अद्भुत संगम का प्रतीक, मेघालय के 'जीवित जड़ पुलों' (Living Root Bridges) को भारत ने यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची के लिए आधिकारिक तौर पर नामांकित किया है। नामांकन डोजियर का शीर्षक "Jingkieng Jri / Lyu Chrai Cultural Landscape" रखा गया है।

'लिविंग रूट ब्रिज' क्या हैं?

ये पुल कंक्रीट या स्टील से नहीं बने हैं, बल्कि जीवित पेड़ों की जड़ों से बने हैं। ये मेघालय के स्वदेशी खासी (Khasi) और जयंतिया (Jaintia) समुदायों द्वारा बनाए और संरक्षित किए जाते हैं।

  • निर्माण प्रक्रिया: स्थानीय लोग रबड़ के पेड़ (Ficus elastica) की हवाई जड़ों को नदियों के पार निर्देशित करने के लिए सुपारी के तनों का उपयोग करते हैं। समय के साथ, ये जड़ें मजबूत होकर पुल का रूप ले लेती हैं।
  • स्थायित्व: एक पुल को कार्यात्मक होने में 15 से 30 साल लग सकते हैं, लेकिन ये सैकड़ों वर्षों तक जीवित रहते हैं और समय के साथ और मजबूत होते जाते हैं।
  • सांस्कृतिक महत्व: ये पुल केवल बुनियादी ढांचा नहीं हैं; ये लोगों, प्रकृति और पारंपरिक ज्ञान के बीच गहरे सामंजस्य का प्रतीक हैं। यह 'जैव-अभियांत्रिकी' (Bio-engineering) का एक प्राचीन और टिकाऊ उदाहरण है।

यूनेस्को टैग क्यों महत्वपूर्ण है?

विश्व धरोहर टैग मिलने से न केवल इन पुलों को वैश्विक पहचान मिलेगी, बल्कि इनके संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय धन और तकनीकी सहायता भी प्राप्त होगी। यह मेघालय में स्थायी पर्यटन (Sustainable Tourism) को बढ़ावा देगा।


3. रक्षा: कैप्टन हंसजा शर्मा बनीं रुद्र हेलीकॉप्टर की पहली महिला पायलट

भारतीय सेना के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। कैप्टन हंसजा शर्मा ने 'रुद्र' (Rudra) सशस्त्र हेलीकॉप्टर उड़ाने के लिए अर्हता प्राप्त करने वाली भारतीय सेना की पहली महिला पायलट बनकर इतिहास रच दिया है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि रुद्र एक फ्रंटलाइन कॉम्बैट (लड़ाकू) मशीन है।

🚁 'रुद्र' (Rudra) हेलीकॉप्टर के बारे में जानें:

रुद्र, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा विकसित 'ध्रुव' एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) का एक हथियारबंद संस्करण (Armed Variant) है। इसे 'उड़ता हुआ टैंक' भी कहा जा सकता है।

  • हथियार प्रणाली: यह 20 मिमी बुर्ज गन, 70 मिमी रॉकेट पॉड्स और एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों से लैस है।
  • भूमिका: इसका उपयोग दुश्मन के टैंकों को नष्ट करने, टोही मिशन (Scouting) और जमीनी सैनिकों को हवाई सहायता प्रदान करने के लिए किया जाता है।
  • तकनीक: इसमें एकीकृत सेंसर, हेलमेट-माउंटेड साइटिंग सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट लगा है।

नारी शक्ति का प्रतीक

कैप्टन हंसजा शर्मा की उपलब्धि भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं के लिए युद्धक भूमिकाओं (Combat Roles) में बढ़ते अवसरों को दर्शाती है। पहले महिलाएं केवल परिवहन विमान या सहायक भूमिकाओं में थीं, लेकिन अब वे लड़ाकू हेलीकॉप्टर उड़ाकर सीधे मोर्चे पर तैनात हो रही हैं। यह कदम 'आत्मनिर्भर भारत' और लैंगिक समानता की दिशा में एक बड़ा संदेश है।

रक्षा प्रश्नोत्तरी

प्रश्न 1: भारतीय सेना की पहली महिला रुद्र हेलीकॉप्टर पायलट कौन बनी हैं?
उत्तर: कैप्टन हंसजा शर्मा।

प्रश्न 2: रुद्र हेलीकॉप्टर का निर्माण किस संस्था ने किया है?
उत्तर: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL)।


आज का विश्लेषण यहीं समाप्त होता है। आर्द्रभूमि के संरक्षण से लेकर आसमान की ऊंचाइयों को छूती नारी शक्ति तक, ये खबरें प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। अपनी तैयारी जारी रखें!