भौतिक भूगोल: 3.खनिज एवं शैल

खनिज एवं शैल: पृथ्वी के आधारभूत निर्माण खंड - विस्तृत अध्ययन
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खनिज एवं शैल: पृथ्वी की संरचनात्मक धरोहर

भौतिक भूगोल: 3.खनिज एवं शैल

पृथ्वी, जो सौरमंडल का एक अद्वितीय ग्रह है, विभिन्न रासायनिक तत्वों और उनके जटिल संयोजनों से बनी है। यदि हम पृथ्वी को एक विशाल इमारत मानें, तो 'खनिज' इसकी ईंटें हैं और 'शैल' उन ईंटों से बनी दीवारें। हमारी पृथ्वी की बाहरी परत यानी भूपर्पटी (Crust) ठोस खनिजों का भंडार है, जबकि इसके आंतरिक भागों में यही तत्व अत्यधिक तापमान और दबाव के कारण पिघली हुई अवस्था (मैग्मा) में मौजूद हैं। भूगोलवेत्ता और भूवैज्ञानिक के लिए शैलों का अध्ययन केवल पत्थरों का अध्ययन नहीं है, बल्कि यह पृथ्वी के करोड़ों वर्षों के इतिहास को पढ़ने जैसा है। इस विस्तृत लेख में हम खनिजों के रासायनिक और भौतिक गुणों, शैलों के तीनों प्रमुख प्रकारों—आग्नेय, अवसादी और कायांतरित—तथा शैली चक्र की उस शाश्वत प्रक्रिया का सूक्ष्म विश्लेषण करेंगे जो निरंतर धरा के स्वरूप को बदल रही है।


1. खनिज (Minerals): अर्थ, संगठन और स्रोत

खनिज एक ऐसा प्राकृतिक पदार्थ है जिसकी एक निश्चित आंतरिक परमाणविक संरचना और विशिष्ट रासायनिक संगठन होता है। यह कार्बनिक (जैसे कोयला) या अकार्बनिक (जैसे क्वार्ट्ज़) दोनों हो सकता है।

भूपर्पटी का रासायनिक संघटन:

पूरी पृथ्वी का निर्माण तो अनेक तत्वों से हुआ है, लेकिन इसकी बाहरी परत यानी भूपर्पटी का लगभग 98 प्रतिशत भाग केवल आठ तत्वों से बना है। शेष 2 प्रतिशत में टाइटेनियम, हाइड्रोजन, फास्फोरस जैसे तत्व शामिल हैं।

  • एल्युमिनियम (Aluminum)
  • तत्व का नाम भूमिका और प्रचुरता
    ऑक्सीजन (Oxygen)सर्वाधिक मात्रा में (लगभग 46.6%) पाया जाने वाला तत्व।
    सिलिकन (Silicon)रेत और चट्टानों का मुख्य आधार (लगभग 27.7%)।
    हल्की धातु, भूपर्पटी के निर्माण में सहायक।
    लोहा (Iron)पृथ्वी की आंतरिक मजबूती और गुरुत्वाकर्षण का आधार।
    कैल्शियम, सोडियम, पोटैशियम, मैग्नीशियमअन्य महत्वपूर्ण धातुएं जो शैल-निर्माणकारी खनिजों का हिस्सा हैं।
    🌋 मैग्मा: खनिजों की जननी
    पृथ्वी के भीतर का गर्म मैग्मा ही सभी खनिजों का आदि स्रोत है। जब मैग्मा ठंडा होता है, तो परमाणुओं के व्यवस्थित होने से क्रिस्टल बनने लगते हैं। यदि मैग्मा धीरे-धीरे ठंडा हो, तो क्रिस्टल बड़े होते हैं और यदि तेजी से ठंडा हो, तो क्रिस्टल सूक्ष्म होते हैं। वर्तमान में 2000 से अधिक खनिजों की पहचान की जा चुकी है, लेकिन सामान्यतः 'फेल्डस्पर' और 'क्वार्ट्ज़' ही शैलों में सर्वाधिक पाए जाते हैं।

    2. खनिजों के भौतिक गुणधर्म (Physical Properties)

    एक खनिज की पहचान उसके बाहरी स्वरूप और आंतरिक संरचना के आधार पर की जाती है। खनिज विज्ञान में निम्नलिखित भौतिक गुण अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:

    1. क्रिस्टल का रूप: अणुओं की आंतरिक व्यवस्था के अनुसार खनिज का आकार तय होता है, जैसे घनाकार (Cube) या षट्भुजाकार (Hexagonal)।
    2. विदलन (Cleavage): किसी विशेष दिशा में समतल सतह के साथ टूटने की प्रवृत्ति। जैसे अभ्रक (Mica) पतली चादरों में टूटता है।
    3. विभंजन (Fracture): यदि परमाणविक संरचना जटिल है, तो खनिज अनियमित तरीके से टूटता है।
    4. चमक (Lustre): बिना रंग के प्रकाश को परावर्तित करने की क्षमता। यह धात्विक (Metallic), रेशमी (Silky) या कांच जैसी (Vitreous) हो सकती है।
    5. रंग: कुछ खनिजों का रंग उनकी मूल संरचना से आता है (जैसे मैलाकाइट का हरा), जबकि कुछ में अशुद्धियों के कारण रंग बदलता है (जैसे क्वार्ट्ज़)।
    6. कठोरता (Hardness): इसके लिए 'मोह स्केल' (Mohs Scale) का उपयोग होता है।
      • सबसे नरम (1): टैल्क (Talc)
      • सबसे कठोर (10): हीरा (Diamond)

    3. खनिजों का वर्गीकरण: धात्विक और अधात्विक

    खनिजों को उनके गुणों और उपयोग के आधार पर दो मुख्य श्रेणियों में बाँटा जाता है:

    A. धात्विक खनिज (Metallic Minerals)

    इनमें धातुओं के अंश होते हैं। इन्हें तीन भागों में बाँटा गया है:

    • बहुमूल्य धातु: स्वर्ण (सोना), चाँदी, प्लैटिनम।
    • लौह धातु: लोहा और वे धातुएं जो स्टील बनाने में मिलाई जाती हैं।
    • अलौह धातु: ताँबा, सीसा, जस्ता, टिन, एल्युमिनियम।

    B. अधात्विक खनिज (Non-Metallic Minerals)

    इनमें धातुओं का अभाव होता है। जैसे—गंधक, फॉस्फेट, नाइट्रेट और चूना पत्थर। सीमेंट वास्तव में अधात्विक खनिजों का एक जटिल मिश्रण है।


    4. शैलें (Rocks): निर्माण और वर्गीकरण

    शैल भूपर्पटी का वह ठोस भाग है जो एक या अधिक खनिजों से बना होता है। यह कठोर (ग्रेनाइट की तरह) या नरम (खड़िया की तरह) हो सकती है। भूगोलवेत्ता के लिए शैलों का ज्ञान इसलिए अनिवार्य है क्योंकि ये मृदा के प्रकार और भू-आकृतियों को निर्धारित करती हैं। निर्माण पद्धति के आधार पर शैलों के तीन वर्ग हैं:


    5. आग्नेय शैल (Igneous Rocks): प्राथमिक नींव

    आग्नेय शब्द लैटिन के 'इग्निस' (Ignis) से बना है, जिसका अर्थ है 'अग्नि'। ये शैलें मैग्मा और लावा के ठंडे होने से बनती हैं। चूँकि ये सबसे पहले बनी थीं, इसलिए इन्हें प्राथमिक शैल कहा जाता है।

    विशेषताएं और प्रकार:

    • पातालीय (Plutonic): जब मैग्मा पृथ्वी की गहराई में ही धीरे-धीरे ठंडा होता है। इसके कण बड़े होते हैं। उदाहरण—ग्रेनाइट।
    • ज्वालामुखीय (Volcanic): जब लावा धरातल पर आकर तेजी से ठंडा होता है। इसके कण बहुत छोटे और चिकने होते हैं। उदाहरण—बैसाल्ट।
    • बनावट: आग्नेय शैलें रवेदार (Crystalline) होती हैं और इनमें परतें नहीं पाई जातीं।

    6. अवसादी शैल (Sedimentary Rocks): परतों का इतिहास

    सेडिमेंट्री शब्द 'सेडिमेंटम' (Sedimentum) से बना है, जिसका अर्थ है 'बैठना' या 'व्यवस्थित होना'। पृथ्वी की सतह पर मौजूद चट्टानें जब अपक्षय और अपरदन के कारण टूटती हैं, तो उनके अंशों का जमाव परतों के रूप में होता है।

    🏗️ शिलीभवन (Lithification):
    विभिन्न परतों के जमा होने और अत्यधिक दबाव के कारण उनके ठोस शैल में बदलने की प्रक्रिया को शिलीभवन कहते हैं। इसी कारण अवसादी शैलों में भिन्न-भिन्न मोटाई की परतें साफ़ दिखाई देती हैं।

    निर्माण के आधार पर प्रकार:

    1. यांत्रिकी (Mechanically): बालुकाश्म (Sandstone), शेल।
    2. कार्बनिक (Organically): कोयला, चूना पत्थर, गीज़राइट।
    3. रासायनिक (Chemically): पोटाश, हेलाइट (नमक), शृंग प्रस्तर।

    7. कायांतरित शैल (Metamorphic Rocks): रूपांतरण की शक्ति

    कायांतरित का अर्थ है 'स्वरूप में परिवर्तन'। जब पुरानी चट्टानों (आग्नेय या अवसादी) पर अत्यधिक दबाव (Pressure), आयतन (Volume) और तापमान (Temperature) यानी P.V.T. का प्रभाव पड़ता है, तो उनका रूप बदल जाता है।

    कायांतरण की प्रक्रियाएँ:

    • ऊष्मीय कायांतरण: मैग्मा के संपर्क में आने से चट्टान का पिघलना और पुनः ठोस होना।
    • प्रादेशिक कायांतरण: विवर्तनिक दबाव (Plate Movement) के कारण बड़े क्षेत्रों की चट्टानों का पुनर्गठन।
    • पत्रण (Foliation): कायांतरण के दौरान खनिजों का परतों या रेखाओं में व्यवस्थित होना।

    उदाहरण: स्लेट (शेल से), संगमरमर (चूना पत्थर से), क्वार्ट्ज़ाइट (बालुकाश्म से) और नीस (ग्रेनाइट से)।


    8. शैली चक्र (The Rock Cycle): शाश्वत परिवर्तन

    पृथ्वी पर कोई भी शैल स्थायी नहीं है। शैली चक्र वह निरंतर प्रक्रिया है जिसमें पुरानी शैलें परिवर्तित होकर नया रूप लेती हैं।

    🔄 चक्र का प्रवाह:
    मैग्मा से **आग्नेय शैल** बनती है। आग्नेय शैलें टूटकर **अवसादी शैल** बनाती हैं। आग्नेय और अवसादी शैलें दबाव और ताप के कारण **कायांतरित** हो जाती हैं। जब ये कायांतरित शैलें पृथ्वी की गहराई में जाती हैं, तो पुनः पिघलकर **मैग्मा** बन जाती हैं। इस प्रकार यह चक्र करोड़ों वर्षों से निरंतर चल रहा है।

    9. पेट्रोलॉजी और आर्थिक महत्व

    शैलों का अध्ययन न केवल शैक्षणिक है, बल्कि आर्थिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। शैलों से ही हमें धात्विक खनिज, ईंधन (कोयला, तेल) और भवन निर्माण सामग्री (पत्थर, संगमरमर) प्राप्त होती है।

    • मृदा निर्माण: शैलों के अपक्षय से ही मिट्टी बनती है, जो कृषि का आधार है।
    • भू-आकृतियाँ: कठोर शैलें ऊँचे पर्वत बनाती हैं, जबकि कोमल शैलें घाटियों और मैदानों का निर्माण करती हैं।

    अभ्यास: महत्वपूर्ण प्रश्न एवं समाधान

    1. प्राथमिक शैलें किन्हें कहा जाता है?
    उत्तर: आग्नेय शैलों को प्राथमिक शैल कहा जाता है क्योंकि वे मैग्मा के ठंडे होने से सबसे पहले बनती हैं।

    2. मोह स्केल (Mohs Scale) क्या है?
    उत्तर: यह खनिजों की कठोरता मापने का पैमाना है, जिसमें 1 (टैल्क) से 10 (हीरा) तक की रेटिंग होती है।

    3. जीवाश्म (Fossils) किन शैलों में पाए जाते हैं?
    उत्तर: जीवाश्म मुख्य रूप से अवसादी शैलों में पाए जाते हैं क्योंकि इनमें परतों का क्रमिक जमाव होता है।

    4. ग्रेनाइट का कायांतरित रूप क्या है?
    उत्तर: ग्रेनाइट कायांतरण के बाद 'नीस' (Gneiss) में बदल जाता है।


    निष्कर्ष: एक गतिशील भूगर्भिक तंत्र

    खनिज एवं शैलों का यह विस्तृत अध्ययन हमें सिखाता है कि जिस धरती पर हम खड़े हैं, वह एक अत्यंत सक्रिय रासायनिक प्रयोगशाला है। आग्नेय शैलें पृथ्वी की आंतरिक ऊर्जा का प्रमाण हैं, अवसादी शैलें समय के साथ संचित इतिहास की परतें हैं, और कायांतरित शैलें प्रकृति की अदम्य परिवर्तनकारी शक्ति का प्रतीक हैं। शैली चक्र हमें याद दिलाता है कि परिवर्तन ही प्रकृति का नियम है। इन सूक्ष्म पदार्थों की समझ ही हमें प्राकृतिक आपदाओं, संसाधनों के प्रबंधन और पृथ्वी के भविष्य को बेहतर ढंग से समझने में सक्षम बनाती है।

    💡 अंतिम संदेश: भूगोल केवल मानचित्रों का विज्ञान नहीं है, यह उस मिट्टी और पत्थर का राग है जिसने हमें जन्म दिया है। प्रकृति के इन उपहारों का सम्मान करें और अपनी जिज्ञासा को सदैव जीवित रखें। निरंतर सीखते रहें!