करेंट अफेयर्स: 5 फरवरी 2026

करेंट अफेयर्स: 5 फरवरी 2026
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दैनिक करेंट अफेयर्स: पुरस्कार, विज्ञान और संस्कृति

करेंट अफेयर्स: 5 फरवरी 2026

आज के विस्तृत विश्लेषण में आपका स्वागत है। आज हम संगीत जगत में एक आध्यात्मिक नेता की ऐतिहासिक जीत, जलवायु विज्ञान में एक भारतीय वैज्ञानिक की वैश्विक उपलब्धि, बिहार की एक पवित्र नदी के पौराणिक महत्व और भारत के जनजातीय समुदायों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करेंगे। आइए इन खबरों को विस्तार से जानें।


1. पुरस्कार: दलाई लामा ने 90 साल की उम्र में जीता पहला 'ग्रैमी अवार्ड'

तिब्बती आध्यात्मिक नेता परम पावन दलाई लामा ने लॉस एंजिल्स, यूएसए में आयोजित 68वें वार्षिक ग्रैमी अवार्ड्स (2026) में इतिहास रच दिया है। उन्होंने 90 वर्ष की आयु में अपना पहला ग्रैमी पुरस्कार जीता है। यह जीत न केवल संगीत जगत के लिए बल्कि आध्यात्मिक दुनिया के लिए भी एक अनूठा क्षण है।

पुरस्कार का विवरण

  • श्रेणी: सर्वश्रेष्ठ ऑडियो बुक, कथन और कहानी सुनाना रिकॉर्डिंग (Best Audio Book, Narration & Storytelling Recording)।
  • एल्बम: "Meditations: The Reflections of His Holiness the Dalai Lama".

एल्बम की विशेषताएं

यह एल्बम केवल संगीत नहीं है, बल्कि शांति का एक संदेश है। इसमें दलाई लामा की शांति, करुणा, ध्यान और सार्वभौमिक जिम्मेदारी (Universal Responsibility) की शिक्षाओं को संगीत और कथन के साथ मिश्रित किया गया है। इसका उद्देश्य संस्कृतियों के बीच सद्भाव का संदेश फैलाना है।

🎵 भारतीय सहयोग: इस प्रोजेक्ट में भारतीय शास्त्रीय संगीत के दिग्गज सरोद वादक उस्ताद अमजद अली खान और उनके बेटों, अमान अली बंगश और अयान अली बंगश का महत्वपूर्ण संगीत योगदान है।

वैश्विक प्रतिक्रिया

इस जीत ने दलाई लामा की आवाज़ और शिक्षाओं की वैश्विक पहुंच को रेखांकित किया है, जो सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और कलात्मक सीमाओं को पार करती है। हालांकि, चीनी सरकार ने इस पुरस्कार की आलोचना की है और इसे "राजनीतिक हेरफेर" करार दिया है, जो दलाई लामा की स्थिति को लेकर लंबे समय से चले आ रहे तनाव को दर्शाता है।


2. विज्ञान: भारतीय मूल के वैज्ञानिक को 'भू-विज्ञान का नोबेल'

भारतीय मूल के प्रसिद्ध जलवायु वैज्ञानिक वीरभद्रन रामनाथन (Veerabhadran Ramanathan) को रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज द्वारा 2026 के क्रॉफर्ड पुरस्कार (Crafoord Prize) से सम्मानित किया गया है। इस पुरस्कार को अक्सर "भू-विज्ञान का नोबेल" कहा जाता है क्योंकि यह उन क्षेत्रों में दिया जाता है जिन्हें नोबेल पुरस्कारों में शामिल नहीं किया गया है।

उनके शोध का महत्व

रॉयल स्वीडिश एकेडमी ने रामनाथन को "अल्पकालिक जलवायु प्रदूषकों (SLCPs) और ग्रीनहाउस प्रभाव की हमारी समझ में अग्रणी योगदान" के लिए चुना है।

  • CFCs की खोज (1975): वे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने यह प्रदर्शित किया कि क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs)—जिन्हें पहले केवल ओजोन परत को नुकसान पहुँचाने के लिए जाना जाता था—अत्यधिक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसें भी हैं।
  • वायुमंडलीय भूरे बादल (Atmospheric Brown Clouds - ABCs): उनके शोध ने दक्षिण एशिया और हिंद महासागर के ऊपर कालिख और धूल के विशाल "भूरे बादलों" की पहचान की।
  • वैश्विक डिमिंग (Global Dimming): उन्होंने दिखाया कि ये कण (ब्लैक कार्बन) सूरज की रोशनी को सोख लेते हैं, जिससे वातावरण गर्म होता है लेकिन साथ ही पृथ्वी की सतह ठंडी होती है (डिमिंग प्रभाव)। यह प्रक्रिया मानसून के पैटर्न को बाधित करती है और ग्लेशियरों के पिघलने को तेज करती है।

3. भूगोल और संस्कृति: फल्गु नदी (Phalgu River)

फल्गु नदी बिहार की संस्कृति और इतिहास का एक अभिन्न अंग है। यह केवल एक जल निकाय नहीं है, बल्कि मोक्ष और ज्ञान का केंद्र है।

भौगोलिक तथ्य

  • उद्गम: यह गया के पास लीलाजन (निरंजना) और मोहना नदियों के संगम से बनती है।
  • अंत: यह अंततः गंगा की एक सहायक नदी, पुनपुन नदी में मिल जाती है।
  • गुप्त गंगा: इसे अक्सर 'गुप्त गंगा' कहा जाता है क्योंकि यह एक विस्तृत, रेतीले तल के नीचे बहती है और वर्ष के अधिकांश समय सतह पर सूखी दिखाई देती है।

ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व

  • बुद्ध का ज्ञान: ऐतिहासिक रूप से इसे निरंजना नदी के रूप में जाना जाता है। इसी नदी के तट पर भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था।
  • सुजाता स्तूप: नदी के पार सुजाता स्तूप स्थित है। यह उस ग्वालिन (सुजाता) को समर्पित है जिसने गौतम बुद्ध को खीर (दूध और चावल) अर्पित की थी, जिससे उन्हें ज्ञान प्राप्ति से पहले शक्ति मिली थी।
  • पिंड दान: यह हिंदू तीर्थयात्रा का एक प्रमुख स्थल है, विशेष रूप से पिंड दान (पितरों की शांति के लिए अनुष्ठान) के लिए, जो गया में विष्णुपद मंदिर के पास नदी के तट पर किया जाता है।
📜 गयासुर की कथा: किंवदंती है कि गयासुर नामक राक्षस को वरदान मिला था कि जो कोई भी उसे देखेगा, उसे मोक्ष मिल जाएगा। इससे प्राकृतिक संतुलन बिगड़ गया। संतुलन बहाल करने के लिए, भगवान विष्णु ने गयासुर के सिर पर अपना पैर रखकर उसे पाताल लोक में धकेल दिया, जिससे गया की एक चट्टान पर उनके पदचिह्न (विष्णुपद) बन गए। यह भी माना जाता है कि माता सीता के श्राप के कारण फल्गु नदी सतह के नीचे बहती है।

4. शासन: भारत टैक्सी (Bharat Taxi)

परिवहन क्षेत्र में एक नई क्रांति के रूप में 'भारत टैक्सी' का उदय हुआ है।

भारत टैक्सी प्रश्नोत्तरी

प्रश्न 1: भारत टैक्सी क्या है?
उत्तर: यह भारत का पहला राष्ट्रीय स्तर का सहकारी राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म (cooperative ride-hailing platform) है।

प्रश्न 2: इसके बिजनेस मॉडल में क्या खास है?
उत्तर: यह शून्य-कमीशन मॉडल (Zero-Commission Model) पर काम करता है, जिसका अर्थ है कि ड्राइवरों को अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा एग्रीगेटर को नहीं देना पड़ता।


5. सामाजिक न्याय: विमुक्त, खानाबदोश और अर्ध-खानाबदोश जनजातियाँ (DNTs)

देश भर की विमुक्त (Denotified), खानाबदोश (Nomadic) और अर्ध-खानाबदोश (Semi-Nomadic) जनजातियाँ 2027 की जनगणना में अपने लिए एक "अलग कॉलम" की मांग को लेकर एक साथ आ रही हैं। यह समुदाय भारत के सबसे उपेक्षित वर्गों में से एक है।

DNTs कौन हैं?

  • विमुक्त जनजातियाँ (Denotified Tribes): ये वे समुदाय हैं जिन्हें ब्रिटिश राज द्वारा 1871 और 1947 के बीच लागू किए गए आपराधिक जनजाति अधिनियम (Criminal Tribes Acts) के तहत 'जन्मजात अपराधी' घोषित किया गया था। आजादी के बाद 1952 में इस अधिनियम को निरस्त कर दिया गया और इन समुदायों को "विमुक्त" (Denotified) कर दिया गया।
  • खानाबदोश जनजातियाँ: वे समुदाय जिनके पास आमतौर पर जमीन नहीं होती और वे आजीविका के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमते रहते हैं।

भारत में स्थिति और आयोग

भारत में लगभग 10% आबादी DNTs की है। इनकी पहचान और कल्याण के लिए कई आयोग बनाए गए:

  • रेन्के आयोग (2008): DNT समुदायों की पहचान और सूची बनाने के लिए।
  • इदाते आयोग (2014): भीकू रामजी इदाते की अध्यक्षता में राष्ट्रीय आयोग का गठन किया गया, जिसने 2018 में अपनी रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट के अनुसार, देश भर में कुल 1235 समुदायों की पहचान DNT के रूप में की गई है।
  • SEED योजना: सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने DNT समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए SEED योजना शुरू की है। यह उन परिवारों के लिए है जिनकी वार्षिक आय 2.50 लाख रुपये या उससे कम है।

6. जनजातीय प्रोफाइल: हक्की-पिक्की जनजाति (Hakki Pikki Tribe)

कर्नाटक की यह जनजाति अपनी अनूठी संस्कृति और इतिहास के लिए जानी जाती है।

नाम का अर्थ

कन्नड़ भाषा में, 'हक्की' का अर्थ है 'पक्षी' और 'पिक्की' का अर्थ है 'पकड़ना'। इसलिए, इस समुदाय को पारंपरिक रूप से 'पक्षी पकड़ने वाला' (Bird Catcher) कहा जाता है।

इतिहास और भाषा

  • उत्पत्ति: वे मानते हैं कि उनके पूर्वज महान महाराणा प्रताप से जुड़े क्षत्रिय या योद्धा थे। मुगलों से हारने के बाद उनके पूर्वज दक्षिण भारत में चले गए थे।
  • भाषा: दक्षिण भारत में द्रविड़ भाषाओं से घिरे होने के बावजूद, यह समुदाय एक इंडो-आर्यन भाषा बोलता है। विद्वानों ने उनकी मातृभाषा को 'वागरी' (Vaagri) नाम दिया है।

हक्की-पिक्की जनजाति प्रश्नोत्तरी

प्रश्न 1: हक्की-पिक्की जनजाति के वर्तमान व्यवसाय क्या हैं?
उत्तर: वे अब मसाले, फूल, आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन, हर्बल तेल बेचते हैं और खेत मजदूर या औजारों को धार लगाने वाले के रूप में भी काम करते हैं।

प्रश्न 2: यह जनजाति विशेष रूप से किसके लिए प्रसिद्ध है?
उत्तर: वे अपने स्वदेशी पौधों और जड़ी-बूटियों पर आधारित चिकित्सा प्रणालियों के लिए प्रसिद्ध हैं। वे अक्सर अपने हर्बल उत्पादों को बेचने के लिए अफ्रीका और अन्य देशों की यात्रा करते हैं।


आज का विस्तृत विश्लेषण यहीं समाप्त होता है। ग्रैमी के मंच से लेकर बिहार की नदियों और कर्नाटक के जंगलों तक, ये विषय आपकी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। अपनी तैयारी जारी रखें!