मध्यकालीन इतिहास: 7. विजयनगर साम्राज्य (हम्पी)

मध्यकालीन इतिहास: विजयनगर साम्राज्य (हम्पी)
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अध्याय-7. एक साम्राज्य की राजधानी: विजयनगर

मध्यकालीन इतिहास: विजयनगर साम्राज्य (हम्पी)

विजयनगर अथवा "विजय का शहर" एक साम्राज्य और एक शहर, दोनों के लिए प्रयुक्त नाम है। इसकी स्थापना 1336 में हरिहर और बुक्का नामक दो भाइयों ने की थी। यह उत्तर में कृष्णा नदी से लेकर प्रायद्वीप के सुदूर दक्षिण तक फैला था। 1565 में तालीकोटा के युद्ध के बाद इसे लूटा गया और यह उजड़ गया। लोगों ने इसे 'हम्पी' नाम से याद रखा, जो यहाँ की स्थानीय मातृदेवी पम्पादेवी के नाम से निकला है। समकालीन लोगों ने इसे 'कर्नाटक साम्राज्यमु' की संज्ञा दी।


1. हम्पी की खोज (कॉलिन मॅकेन्जी)

हम्पी के भग्नावशेषों को प्रकाश में लाने का श्रेय कर्नल कॉलिन मॅकेन्जी को जाता है।

  • परिचय: वे एक अभियंता, सर्वेक्षक और मानचित्रकार थे। 1815 में उन्हें भारत का पहला सर्वेयर जनरल बनाया गया।
  • जानकारी का स्रोत: उन्होंने विरुपाक्ष मंदिर और पम्पादेवी पूजास्थल के पुरोहितों की स्मृतियों के आधार पर शुरुआती नक्शे तैयार किए।
  • महत्व: 1976 में हम्पी को राष्ट्रीय महत्त्व के स्थल के रूप में मान्यता मिली।

2. राजनैतिक संरचना और प्रशासन

शासक और उपाधियाँ

  • राय (Raya): विजयनगर के शासक स्वयं को 'राय' कहते थे (शाब्दिक अर्थ: मुखिया)।
  • नरपति: रायों को 'नरपति' (लोगों के स्वामी) कहा जाता था।
  • गजपति: उड़ीसा के शासक 'गजपति' (हाथियों के स्वामी) कहलाते थे।
  • अश्वपति: दक्कन के सुल्तान 'अश्वपति' (घोड़ों के स्वामी) कहलाते थे।
  • हिन्दू सूरतराणा: विजयनगर के शासक स्वयं को 'हिन्दू सुल्तान' (हिन्दू सूरतराणा) भी कहते थे।

अमर नायक प्रणाली (Amar Nayaka System)

यह विजयनगर साम्राज्य की एक प्रमुख राजनीतिक खोज थी। संभवतः यह दिल्ली सल्तनत की 'इक्ता प्रणाली' से प्रभावित थी।

  • कौन थे: ये सैनिक कमांडर थे जिन्हें राय द्वारा प्रशासन के लिए राज्य क्षेत्र दिए जाते थे।
  • कार्य: वे किसानों और शिल्पकारों से कर वसूलते थे। राजस्व का एक भाग वे अपने व्यक्तिगत उपयोग और घोड़ों/हाथियों के दल के रख-रखाव के लिए रखते थे।
  • नियंत्रण: वे राजा को वर्ष में एक बार भेंट भेजते थे और अपनी स्वामिभक्ति प्रकट करते थे। राजा उन्हें स्थानांतरित कर उन पर नियंत्रण रखता था।

3. कृष्णदेव राय (तुलुव वंश)

कृष्णदेव राय (1509-1529 ई.) विजयनगर के सबसे महान सम्राट माने जाते हैं।

  • विस्तार और सुदृढ़ीकरण: उन्होंने उड़ीसा के गजपति शासकों का दमन किया और बीजापुर के सुल्तान को हराया।
  • साहित्य: वे स्वयं एक महान विद्वान थे। उन्होंने तेलुगु में 'अमुक्तमाल्यद' नामक राजनीति पर ग्रंथ लिखा। उनके दरबार में तेलुगु के 8 महान कवि थे जिन्हें 'अष्टदिग्गज' कहा जाता था। उन्हें 'आंध्रभोज' भी कहा जाता था।
  • स्थापत्य: उन्होंने अपनी माँ के नाम पर नगलपुरम् उपनगर बसाया। उन्होंने भव्य गोपुरमों (मंदिर प्रवेश द्वार) का निर्माण कराया।

4. जल प्रबंधन (Water Management)

विजयनगर प्रायद्वीप के सबसे शुष्क क्षेत्रों में से एक था, इसलिए जल संचयन महत्वपूर्ण था।

  • तुंगभद्रा नदी: यह एक प्राकृतिक कुंड बनाती है। धाराओं के साथ बाँध बनाकर हौज बनाए गए।
  • कमलपुरम् जलाशय: 15वीं शताब्दी में निर्मित। इसके पानी से खेतों की सिंचाई होती थी और एक नहर के माध्यम से इसे 'राजकीय केंद्र' तक ले जाया जाता था।
  • हिरिया नहर: तुंगभद्रा पर बने बाँध से पानी लाया जाता था, जो 'धार्मिक केंद्र' और 'शहरी केंद्र' को अलग करने वाली घाटी को सिंचित करता था।

5. किलेबंदी और सड़कें

फारसी यात्री अब्दुर रज्जाक (15वीं सदी) ने विजयनगर की किलेबंदी को देखकर आश्चर्य व्यक्त किया।

  • सात पंक्तियाँ: किलेबंदी की सात दीवारों का उल्लेख मिलता है। इसमें न केवल शहर, बल्कि कृषि क्षेत्र और जंगलों को भी घेरा गया था।
  • उद्देश्य: युद्ध के समय घेराबंदी से निपटने के लिए, ताकि खाद्य सामग्री की कमी न हो।
  • तकनीक: दीवारों के निर्माण में गारे का प्रयोग नहीं किया गया था; पत्थर के टुकड़े अपने भार से ही टिके थे।
  • सड़कें: सड़कें पहाड़ी भू-भाग से बचकर घाटियों से होकर जाती थीं। मंदिर के प्रवेश द्वारों से आगे बढ़ी हुई सड़कों के दोनों ओर बाजार थे।

6. राजकीय केंद्र (The Royal Centre)

यह बस्ती के दक्षिण-पश्चिमी भाग में स्थित था। इसमें 60 से अधिक मंदिर थे।

महानवमी डिब्बा

यह शहर के सबसे ऊंचे स्थानों में से एक विशालकाय मंच है (11,000 वर्ग फीट आधार)।

  • अनुष्ठान: यहाँ दशहरा (महानवमी) के अवसर पर अनुष्ठान होते थे। राजा अपनी शक्ति और प्रतिष्ठा का प्रदर्शन करता था।
  • कार्यक्रम: शोभायात्रा, जानवरों की बलि, और नायकों द्वारा राजा को भेंट देना।

कमल महल (Lotus Mahal)

यह राजकीय केंद्र का सबसे सुंदर भवन है। इसका नामकरण 19वीं सदी के अंग्रेज यात्रियों ने किया।

  • संरचना: इसमें नौ मीनारें थीं। इसकी मेहराबें इंडो-इस्लामिक शैली से प्रभावित थीं।
  • उपयोग: मैकेन्जी के अनुसार, यह एक 'परिषदीय सदन' था जहाँ राजा अपने परामर्शदाताओं से मिलता था।

हजार राम मंदिर

यह राजकीय केंद्र में स्थित था। इसका प्रयोग संभवतः केवल राजा और उनके परिवार द्वारा किया जाता था। इसकी दीवारों पर रामायण के दृश्य उकेरे गए हैं।


7. धार्मिक केंद्र (The Sacred Centre)

यह तुंगभद्रा नदी के तट पर चट्टानी उत्तरी भाग में स्थित था। मान्यताओं के अनुसार, यह बाली और सुग्रीव के वानर राज्य (किष्किंधा) की रक्षा करता था।

विरुपाक्ष मंदिर

  • भगवान शिव (विरुपाक्ष) को समर्पित।
  • यहाँ स्थानीय मातृदेवी पम्पादेवी ने विरुपाक्ष से विवाह के लिए तप किया था। यह विवाह उत्सव आज भी हर साल मनाया जाता है।
  • कृष्णदेव राय का योगदान: उन्होंने अपने राज्यारोहण के उपलक्ष्य में मुख्य मंदिर के सामने एक भव्य मंडप और पूर्वी गोपुरम बनवाया।

विट्ठल मंदिर

  • प्रमुख देवता: विट्ठल (विष्णु का रूप, जो मुख्य रूप से महाराष्ट्र में पूजे जाते हैं)।
  • अनूठापन: यहाँ पत्थर का बना एक रथ (Chariot) है जो मंदिर का हिस्सा है।
  • रथ गलियाँ: मंदिर के गोपुरम से सीधी रेखा में जाने वाली गलियाँ, जिनके दोनों ओर स्तंभ वाले मंडप थे जहाँ बाजार लगते थे।

8. साम्राज्य का पतन (The Decline)

1565 ई. में तालीकोटा का युद्ध (जिसे राक्षसी-तांगड़ी का युद्ध भी कहते हैं) हुआ।

  • नेतृत्व: विजयनगर सेना का नेतृत्व प्रधानमंत्री रामराय ने किया।
  • विपक्ष: बीजापुर, अहमदनगर और गोलकुंडा की संयुक्त सेनाएँ।
  • परिणाम: विजयनगर की करारी हार हुई। शहर को लूटा गया और जला दिया गया।
  • कारण: रामराय की जोखिम भरी नीतियां (सुल्तानों को एक-दूसरे के खिलाफ लड़ाना) और सुल्तानों की एकजुटता।
📚 विदेशी यात्री:
1. अब्दुर रज्जाक (समरकंद): किलेबंदी और कृषि क्षेत्रों का वर्णन।
2. डोमिंगो पेस (पुर्तगाल): महानवमी डिब्बा और शहर की भव्यता का वर्णन।
3. फर्नाओ नूनिज (पुर्तगाल): हम्पी के बाजारों और जल प्रणाली का उल्लेख।
4. निकोलों दी कोन्टी (इटली): विजयनगर आने वाला पहला यात्री।