अध्याय-2. राजा, किसान और नगर: आरंभिक राज्य और अर्थव्यवस्थाएँ
📅 Date: 24 February 2026 (Tuesday)
लगभग 600 ई.पू. से 600 ई. तक का काल भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण परिवर्तनों का साक्षी रहा है। इस दौरान आरंभिक राज्यों का उदय हुआ, लोहे के प्रयोग से कृषि का विस्तार हुआ, और नए नगरों का विकास हुआ। इस अध्याय में हम महाजनपदों, मौर्य साम्राज्य, और गुप्त काल के राजनीतिक और आर्थिक ढांचे का विस्तृत अध्ययन करेंगे।
1. वैदिक और महापाषाण संस्कृति
वैदिक संस्कृति
लगभग 1500 ई.पू. में सिंधु नदी और इसकी उपनदियों के किनारे रहने वाले लोगों द्वारा ऋग्वेद का लेखन किया गया। यह काल भारतीय उपमहाद्वीप में आर्यों के आगमन और वैदिक परंपराओं की स्थापना का समय था।
महापाषाण संस्कृति (Megalithic Culture)
1000 ई.पू. के आसपास दक्षिण भारत (दक्कन, कर्नाटक) में शवों के अंतिम संस्कार के नए तरीके सामने आए।
- महापाषाण: शवों को दफनाने के स्थानों पर बड़े-बड़े पत्थर रखे जाते थे।
- लोहे के साक्ष्य: कई स्थानों पर शवों के साथ लोहे के उपकरण और हथियार भी दफनाए गए थे, जो यह दर्शाता है कि इस काल में लोहे का प्रयोग शुरू हो चुका था।
2. छठी शताब्दी ई.पू. के परिवर्तन
यह काल भारतीय इतिहास में एक प्रमुख मोड़ था:
- आरंभिक राज्य: साम्राज्यों और रजवाड़ों का विकास हुआ।
- कृषि में बदलाव: लोहे के हल का प्रयोग शुरू हुआ जिससे कठोर मिट्टी को जोतना आसान हो गया। गंगा घाटी में धान की रोपाई (Transplantation) शुरू हुई, जिससे उपज में भारी वृद्धि हुई।
- सिंचाई: कुओं, तालाबों और नहरों का प्रयोग बढ़ा।
- नगरों का उदय: महाजनपदों की राजधानियाँ बड़े नगरों के रूप में विकसित हुईं।
3. जनपद और महाजनपद
परिभाषा
- जनपद: ऐसा भूखंड जहाँ कोई 'जन' (लोग, कुल या जनजाति) अपना पाँव रखता है या बस जाता है।
- महाजनपद: जब कई जनपद मिलकर एक विशाल भौगोलिक क्षेत्र बनाते थे, तो उसे महाजनपद कहा जाता था।
सोलह महाजनपद
बौद्ध (अंगुत्तर निकाय) और जैन (भगवती सूत्र) ग्रंथों में 16 महाजनपदों का उल्लेख मिलता है।
- शासन प्रणाली: अधिकांश पर राजा का शासन था। लेकिन कुछ, जैसे वज्जि और मल्ल, 'गण' या 'संघ' थे। यहाँ सत्ता एक समूह के हाथ में होती थी और हर व्यक्ति 'राजा' कहलाता था। (महावीर और बुद्ध इन्हीं गणों से थे)।
- किलेबंदी: राजधानियों को प्रायः किले से घेरा जाता था।
- सेना: स्थायी सेना और नौकरशाही तंत्र का विकास हुआ।
- उत्तरी कृष्ण मार्जित पात्र (NBPW): यहाँ से चमकदार कलई वाले मिट्टी के बर्तन मिले हैं, जो अमीर लोगों द्वारा प्रयोग किए जाते थे।
यह एक समूह शासन था जहाँ सत्ता किसी एक व्यक्ति के हाथ में न होकर कुलीन पुरुषों के एक समूह के हाथ में होती थी। रोम के गणराज्य भी इसी प्रकार के समूह शासन थे।
4. मगध का उत्कर्ष
छठी से चौथी शताब्दी ई.पू. में मगध (आधुनिक बिहार) सबसे शक्तिशाली महाजनपद बन गया।
शक्तिशाली होने के कारण
- उपजाऊ भूमि: गंगा घाटी की मिट्टी बहुत उपजाऊ थी।
- लोहे की खदानें: (झारखंड) जिससे हथियार और उपकरण बनाना आसान था।
- हाथी: जंगलों में हाथी उपलब्ध थे जो सेना के लिए महत्वपूर्ण थे।
- यातायात: गंगा और उसकी उपनदियों से सस्ता जल परिवहन संभव था।
- योग्य शासक: बिंबिसार, अजातशत्रु और महापद्मनंद जैसे महत्वाकांक्षी राजा।
- राजगाह (राजगीर): मगध की पहली राजधानी। इसका अर्थ है 'राजाओं का घर'। यह पहाड़ियों से घिरी सुरक्षित जगह थी।
- पाटलिपुत्र (पटना): चौथी शताब्दी ई.पू. में इसे राजधानी बनाया गया क्योंकि यह गंगा नदी के किनारे संचार मार्ग पर स्थित थी।
5. मौर्य साम्राज्य: प्रशासन और महत्व
चंद्रगुप्त मौर्य (321 ई.पू.) ने मौर्य साम्राज्य की स्थापना की, जो पश्चिमोत्तर में अफगानिस्तान तक फैला था।
इतिहास के स्रोत
- मेगस्थनीज़ की 'इंडिका': यूनानी राजदूत का विवरण।
- कौटिल्य का 'अर्थशास्त्र': राजनीति और प्रशासन पर ग्रंथ।
- असोक के अभिलेख: पत्थरों और स्तंभों पर खुदे आदेश।
- विशाखदत्त का 'मुद्राराक्षस': नाटक।
अभिलेख और लिपियाँ
- जेम्स प्रिंसेप (1838): ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी जिन्होंने ब्राह्मी और खरोष्ठी लिपियों को सबसे पहले पढ़ा।
- उपाधियाँ: अभिलेखों में राजा को 'पियदस्सी' (मनोहर मुखाकृति) और 'देवानांपिय' (देवताओं का प्रिय) कहा गया है।
- भाषा: अधिकांश अभिलेख प्राकृत (ब्राह्मी लिपि) में हैं। पश्चिमोत्तर में खरोष्ठी, अरामेइक और यूनानी लिपियों का प्रयोग हुआ।
प्रशासनिक ढांचा
- 5 प्रमुख केंद्र: राजधानी पाटलिपुत्र और चार प्रांतीय केंद्र—तक्षशिला, उज्जयिनी, तोसलि और सुवर्णगिरि।
- सुवर्णगिरि (कर्नाटक): सोने की खदानों के लिए महत्वपूर्ण था।
- समितियाँ: मेगस्थनीज़ ने सैन्य संचालन के लिए 1 समिति और 6 उपसमितियों का उल्लेख किया है (नौसेना, यातायात, पैदल, अश्व, रथ, हाथी)।
- धम्म महामात्त: असोक ने धम्म के प्रचार के लिए इन अधिकारियों की नियुक्ति की।
6. कलिंग युद्ध और असोक का धम्म
असोक ने अपने शासन के 8वें वर्ष में कलिंग (उड़ीसा) पर विजय प्राप्त की। भीषण रक्तपात देखकर उन्होंने युद्ध त्याग दिया।
असोक का धम्म: यह कोई धर्म नहीं बल्कि नैतिक नियमों की संहिता थी। इसमें बड़ों का आदर, संन्यासियों/ब्राह्मणों के प्रति उदारता, और दूसरे धर्मों का सम्मान शामिल था।
7. दक्षिण के राजा और सरदार
दक्कन और दक्षिण भारत (तमिलकम) में चोल, चेर और पाण्ड्य जैसी सरदारियों का उदय हुआ।
- सरदार (Chieftain): इसका पद वंशानुगत हो भी सकता था और नहीं भी। यह लोगों से 'भेंट' (Gifts) लेता था, न कि नियमित कर।
- स्रोत: संगम साहित्य (तमिल) में सरदारों का विवरण मिलता है। महाकाव्य 'सिलप्पादिकारम्' महत्वपूर्ण है।
8. दैविक राजा और गुप्त साम्राज्य
दैविक राजा (Divine Kingship)
शासकों ने अपनी उच्च स्थिति दिखाने के लिए देवताओं से जुड़ना शुरू किया।
- कुषाण शासक: इन्होंने अपनी विशाल मूर्तियाँ (मथुरा के माट में) लगवाईं और 'देवपुत्र' की उपाधि धारण की (संभवतः चीनी शासकों से प्रेरित)।
गुप्त साम्राज्य
सामंतवाद का उदय हुआ। इतिहास साहित्य, सिक्कों और अभिलेखों (प्रशस्तियों) से लिखा गया।
- प्रयाग प्रशस्ति (इलाहाबाद स्तंभ): समुद्रगुप्त के राजकवि हरिषेण ने संस्कृत में इसकी रचना की।
एक कृत्रिम जलाशय जिसका निर्माण मौर्य काल में हुआ। दूसरी शताब्दी ई. में शक शासक रुद्रदमन ने अपने खर्च से इसकी मरम्मत करवाई (प्रजा से कर नहीं लिया)। बाद में गुप्त शासक स्कंदगुप्त ने भी इसकी मरम्मत करवाई।
9. बदलता हुआ देहात (Rural Society)
जनता में राजा की छवि
जातक कथाओं (जैसे गंदतिन्दु जातक) से पता चलता है कि राजा और प्रजा के संबंध अक्सर तनावपूर्ण होते थे। भारी करों से बचने के लिए लोग जंगल भाग जाते थे।
भूमिदान और अग्रहार
आरंभिक शताब्दियों में भूमिदान के प्रमाण मिले हैं।
- अग्रहार: वह भूमि जो ब्राह्मणों को दान दी जाती थी। यहाँ से कर नहीं वसूला जाता था और ब्राह्मणों को स्थानीय लोगों से कर लेने का अधिकार था।
- प्रभावती गुप्त: चंद्रगुप्त द्वितीय की पुत्री और वाकाटक रानी। यद्यपि धर्मशास्त्रों में महिलाओं को भूमि पर अधिकार नहीं था, लेकिन प्रभावती ने 'दंगुन' गाँव दान किया था, जो एक अपवाद है।
10. व्यापार और सिक्के
व्यापार
उपमहाद्वीप और बाहर (रोमन साम्राज्य) के साथ व्यापार होता था। दक्षिण भारत मसालों (खासकर काली मिर्च), कपड़ों और जड़ी-बूटियों के लिए प्रसिद्ध था।
- श्रेणी: उत्पादकों और व्यापारियों का संघ।
- पेरिप्लस अॉफ़ एरीथ्रियन सी: एक यूनानी नाविक द्वारा लिखित पुस्तक जिसमें लाल सागर के बंदरगाहों का वर्णन है।
सिक्के (Numismatics)
- आहत सिक्के (Punch-marked): चाँदी और ताँबे के सबसे पुराने सिक्के (छठी शताब्दी ई.पू.)।
- हिंद-यूनानी (Indo-Greeks): सबसे पहले राजाओं की प्रतिमा और नाम वाले सिक्के जारी किए।
- कुषाण: सबसे पहले सोने के सिक्के (Gold Coins) बड़े पैमाने पर जारी किए।
- गुप्त शासक: सबसे भव्य और शुद्ध सोने के सिक्के जारी किए।
- यौधेय: पंजाब/हरियाणा के गणराज्यों ने ताँबे के सिक्के जारी किए।
